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मोबाइल फोन में एप डाउनलोड करते वक्त रहें सतर्क

मोबाइल फोन में एप डाउनलोड करते वक्त रहें सतर्क, एक क्लिक में खाली हो सकता है खाता

हाईटेक ठगों द्वारा एटीएम ब्लाक होने का झांसा देकर 16 डिजिट के नंबर हासिल कर ठगी करने का तरीका अब बीते जमाने की बात हो गई। हाईटेक ठग इंटरनेट यूजर की आईडी में किसी दूसरी साइट के माध्यम से घुसपैठ कर ठगी का शिकार बना रहे हैं। ठगी के इस नए सिस्टम से ठग इंटरनेट यूजर के अकाउंट की रकम को वालेट में डालने या ऑनलाइन शॉपिंग करने के बजाय डायरेक्ट अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर निकाल सकता है।

प्रभारी एएसपी क्राइम अभिषेक महेश्वरी के मुताबिक गूगल में ऑनलाइन टोल फ्री नंबर सर्च करने पर या गलत साइट से ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों को हाईटेक ठग भ्रमित मैसेज भेजकर मोबाइल सहित कंप्यूटर ऑपरेट करने वालों को एनी डेस्क, टीम विवर, औसर रिमोट डेस्कटॉप, एनी रिमोट फ्रंट डेस्क जैसे एक दर्जन अलग-अलग एप भेजकर यूजर को डाउनलोड करने मैसेज करते हैं।

किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए इस तरह के एप को डाउनलोड करने से यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर को हाईटेक ठग अपने कंट्रोल में लेकर पूरी जानकारी निकाल लेते हैं और उनके अकाउंट को खाली कर देते हैं।

सिस्टम हाईटेक ठग के कंट्रोल में

इन नए एप के माध्यम से हाईटेक ठगों को लोगों का अकाउंट खाली करने में ज्यादा मेहनत करनी नहीं पड़ती। मोबाइल और कंप्यूटर में हमारे जितने डेटा होते हैं, वह ठग के कब्जे में आ जाता है। साथ ही हमारे मोबाइल और कंप्यूटर सिस्टम को ठग जैसा चाहता है, वह वैसे ऑपरेट कर सकता है। अकाउंट से पैसे निकालने के लिए ठग के पास बार-बार ओटीपी नहीं आता, एक ओटीपी के माध्यम से वह अकाउंट से पूरे पैसे निकाल लेता है।

नए तरीके के ठगी में पैसे वापसी की गारंटी नहीं

ठगों द्वारा भेजे गए एनी डेस्क एप को डाउनलोड करने वाले मोबाइल, कंप्यूटर धारकों के अकाउंट से हाईटेक ठग एक झटके में रकम खाली कर देते हैं। इस तरह की ठगी में पैसे मिलने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है। ठगी की रकम वैलेट में ट्रांसफर होने या ठग द्वारा ऑनलाइन खरीदी की जाती है, तो 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट दर्ज कराने पर रकम वापस मिलने की संभावना रहती है।

ऐसे मामलों में ठगी की घटनाएं ज्यादा

अधिकृत ऑनलाइन शॉपिंग साइट को छोड़कर यूजर अगर किसी अन्य तरह की ऑनलाइन शॉपिंग साइट से खरीदी करता है और किसी कारणवश वह खरीदी कैंसल करता है, ऐसी स्थिति में ठग यूजर के पास मोबाइल, कंप्यूटर रिमोट एप भेजकर डाउनलोड करने मैसेज भेजकर ठगी का शिकार बनाता है।

इस तरह से भी बना रहे ठगी का शिकार

हाईटेक ठग मोबाइल यूजर को बैंक या किसी मोबाइल प्रोवाइडर कंपनी का अधिकारी बनकर कॉल करता है। इसके बाद वह उस मोबाइल यूजर को एटीएम के पासवर्ड की जानकारी किसी को नहीं देने की बात कहते हुए बैंक अकाउंट और मोबाइल का डेटा सुरक्षित रखने एक लिंक भेजकर उसे डाउनलोड करने के लिए कहता है। ऐसी स्थिति में कोई ठग के झांसे में आकर उसके दिए एप्लिकेशन या ठग द्वारा बताए गए एप्लिकेशन प्ले स्टोर्स से डाउनलोड कर लेता है। इस स्थिति में मोबाइल ठग के कब्जे में आ जाता है और वह मोबाइल धारक को ठगी का शिकार बना लेता है।

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