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पीएम मोदी ने 14 भाषाओं में ट्वीट कर गरीब कल्याण योजनाओं के विस्तार..

पीएम मोदी ने 14 भाषाओं में ट्वीट कर गरीब कल्याण योजनाओं के विस्तार की दी जानकारी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना वायरस महामारी को लेकर लोगों की लापरवाही के साथ कई महत्वपूर्ण बातें कही। इसके साथ ही पीएम मोदी ने गरीब लोगों को मुफ्त चावल और गेहूं की योजना को नवंबर तक बढ़ाने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से करीब 80 करोड़ लोगों को फायदा होगा। पीएम मोदी ने इन योजनाओं के बारे में अपने ट्विटर हैंडल से 14 अलग-अलग भाषाओं में ट्वीट किया।

उन्होंने मैथिली, भोजपुरी, कश्मीरी, मलयालम, ओडिया, बंगाली, पंजाबी समेत अलग-अलग 14 भाषाओं लिखकर में वीडियो को ट्वीट करते हुए लोगों को इस बारे में जानकारी दी और बताया कि गरीब लोगों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए यह योजना है।

उन्होंने आगे लिखा कि पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना विस्तार भारत के करोड़ों गरीब लोगों के लिए है।

पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत 80 करोड़ लोगों को 5 किलो गेंहू या चावल मुफ्त मिलेगा। सरकार उनको नवंबर तक पांच किलो गेंहू या चावल और हर परिवार को एक किलो चना नवंबर तक देगी।

प्रधानमंत्री ने देश के संबोधित करते हुए इस योजना को दीवाली तक विस्तारित करने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों ने देश के अन्न भंडार को भर दिया है, हम आत्मनिर्भर भारत का संकल्प पूरा करेंगे। पीएम ने कहा कि अब पूरे भारत के लिए एक राशन-कार्ड की व्यवस्था भी हो रही है। यानि एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड। इसका सबसे बड़ा लाभ उन गरीब साथियों को मिलेगा, जो रोज़गार या दूसरी आवश्यकताओं के लिए अपना गांव छोड़कर के कहीं और जाते हैं।

पीएम ने कहा कि आज गरीब को, ज़रूरतमंद को, सरकार अगर मुफ्त अनाज दे पा रही है तो इसका श्रेय प्रमुख रूप से दो वर्गों को जाता है। पहला- हमारे देश के मेहनती किसान, हमारे अन्नदाता। दूसरा- हमारे देश के ईमानदार टैक्सपेयर।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों के लिए पौने दो लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया। बीते 3 महीनों में 20 करोड़ गरीब परिवारों के जनधन खातों में सीधे 31 हजार करोड़ रुपए जमा करवाए गए। 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए जमा हुए हैं।

पीएम मोदी ने 14 भाषाओं में ट्वीट कर गरीब कल्याण योजनाओं के विस्तार..

हमारे यहां वर्षा ऋतु के दौरान और उसके बाद मुख्य तौर पर एग्रीकल्चर सेक्टर में ही ज्यादा काम होता है। अन्य दूसरे सेक्टरों में थोड़ी सुस्ती रहती है। जुलाई से धीरे-धीरे त्योहारों का भी माहौल बनने लगता है। त्योहारों का ये समय, जरूरतें भी बढ़ाता है, खर्चे भी बढ़ाता है।

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